Saturday, July 1, 2017

बदलता समय


एक  चिड़िया
गाती है भोर का गीत ,
एक चिड़िया 
भरती है उड़ान,
एक चिड़िया 
फड़फड़ाती है और दम तोड़ देती है पिंजड़े के भीतर ,
चिड़िया वही है 
भोर वही है 
पंख वही हैं 
पिंजड़ा वही है 
बस बदला है तो समय 
और एक स्वतंत्र व्यक्तित्व होने के मायने। 




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