Saturday, July 22, 2017

पुरानी किताब हूं

मै रीति हूं, रिवाज़ हूं ,पुराना हिसाब हूं,
बंद दरवाजों में पडा पुराना असबाब हूं.
कीमत कुछ भी नहीं मेरी फिरभी ;
हाथ आयी अचानक पुरानी किताब हूं.

रख लो सन्भाल कर या बेच दो रद्दी में
मैं पुस्तैनी मकान में पडा दादा जी का ख्वाब हूं.

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