Sunday, July 23, 2017

#किसान ने की आत्महत्या (काश... बचा पाती तुम्हें अखबार की सुर्खियाँ बनाने से)


काश मै दे पाती तुम्हे
थोड़ी सी बारिश , थोड़ी सी हवा,
एक नदी की रवानी , एक फूल की कहानी,
काश सौप पाती तुम्हे,
एक पूरा का पूरा मौसम;
जो लहलहाता तुम्हारे खेत.
काश रख पाती कुछ रोटियां तुम्हारी थाली में;
थोड़ा सा नून , थोड़ा सा तेल,
बढ़ा पाती  तुम्हारी खुराक में,
काश कागज के कुछ टुकड़े बन;
चुका  पाती  तुम्हारा कर्ज, 
जिसके लिए तुम रात रात भर नहीं सोते ,
काश बन पाती तुम्हारी ढाल
बैंक वालों के सामने 
बचा पाती तुम्हारा चूर चूर होता स्वाभिमान 

काश... बचा पाती तुम्हें अखबार की सुर्खियाँ बनने से ;
कि आज एक और किसान ने आत्महत्या कर ली . 

No comments:

Post a Comment

अटल जी की अवधी बोली में लिखी कविता

मनाली मत जइयो मनाली मत जइयो, गोरी  राजा के राज में जइयो तो जइयो,  उड़िके मत जइयो,  अधर में लटकीहौ,  वायुदूत के जहाज़ मे...