Thursday, July 20, 2017

उठो राजरानी !

उठो राजरानी !
कड़वी बातों का रास लो,
तानों की माला गूंथो,
कोई हाथ उठा दे तो प्यार समझो।

पिया के घर जाने का तुम्हे की शौक़ था।
सजने संवारने का तुम्हे ही शौक था।

अब लो !
अपने माथे पर नीलशाह का टीका लगाओ,
कलाई पर टूटी हुई चूड़ियों की मेंहदी  सजाओ ,
अकड़ी हुई कमर पर करधनी पहनो,
पाज़ेब में मर्यादा की बेड़िया बजाओ।

उठो राजरानी !
अपने सच का सामना करो,
अरे अब तो आँखे खोले!
प्यार और हिंसा में फर्क समझो !

अरे अब तो चुगलियां बंद करो,
अपने जैसों से हाथ मिलाओ'
अपनी क्षमता का परहम लहराओ,

उठो राजरानी !
जरा जोश में आओ !
अपनी क्षमता का परहम लहराओ।
अपनी क्षमता का परहम लहराओ।

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