Tuesday, December 5, 2017

टहनियों की पंहुच



उसके साथ आलिंगनबद्ध होने पर भी,
खींच ही लाती हैं मेरी टहनियां तुम्हे
और वो तकती है मेरी राह
कि कब पंहुचेगे मेरे हाथ उसके तने तक
जानती नहीं
परजीवी हूँ 
जीती हूं तुम्हारा ही रस पीकर
तुम्ही से है मेराअस्तित्व
और वो!
धरा है
तुम्हारा आधार
छोड़ नहीं सकते उसे
और मुझे भी
तुम उससे जीते हो
और मै तुमसे.

(image credit google)

    

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