Wednesday, January 10, 2018

ज़िंदा होने की कीमत


4 comments:

  1. शानदार प्रस्तुति. थोड़े से अल्फ़ाज़ काफ़ी है मौजूदा परिवेश की तस्वीर सामने रखने के लिये. रचनाकार का दायित्व है कि हालात का दस्तावेज़ी ज़िक्र प्रस्तुत करे.
    सटीक चिंतन से परिपूर्ण असरदार रचना.
    बधाई एवं शुभकामनायें.
    ब्लॉग सेतु से पता चला आज आपका जन्म दिवस है.
    जन्म दिवस की मंगलकामनाएें.
    लिखते रहिये.

    ReplyDelete
    Replies
    1. आदरणीय रवीन्द्र जी, इतनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिये सादर आभारी हूं.साहित्य समय का साक्षी है यही सोच कर समय को लिखना चाहती हूं. आप जैसे लोग जब प्रशन्शा के दो शब्द भी बोलते हैं तो और लिखने का उत्साह प्रबल होता है .शुभकामनाओं के लिये धन्यवाद

      Delete
  2. जनन दिन की शुभकामनाएँ हालाँकि देरी से ...
    गहरी रचना कुछ शब्दों में सदी की बात ... सत्य का सामना ज़रूरी है

    ReplyDelete

खरीद -फ़रोख़्त (#Human trafficking)

बिकना मुश्किल नहीं न ही बेचना, मुश्किल है गायब हो जाना, लुभावने वादों और पैसों की खनक खींच लेती है इंसान को बाज़ार में, गांवो...