परिंदे


दो परिंदे मेरी मुंडेर पर बैठे है
एक दूसरे के प्रेम में गुंथे हुए .....
दोनों साथ-साथ दाना लाये और खाने लगे .
एक दूसरे के स्पर्श से दूर कि उन्हें :
प्रेम का रिश्ता निभाने के लिए किसी अवलंब की आवश्यकता नहीं .
वे साथ है अपने अस्तित्व की तरह
कि उनका प्रेम साझा है ,
उनकी भूख साझी है ,

और उनकी उड़ान साझी है .

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