Thursday, May 19, 2022

दुविधा



पैरों ने सबसे पहले शुक्रिया कहा जूतों को,
जूतों ने कदमों का साथ दिया,
कदमों ने रास्ते का चुम्बन लिया
और रास्ते ने सफलता झोली में डाल दी..

उनका साथ, उनका प्यार किसी दुविधा में नहीं था।



©️ अपर्णा बाजपेई

Monday, May 9, 2022

मर्द हूं, अभिशप्त हूं

मर्द हूँ, 
अभिशप्त हूँ, 
जीवन के दुखों से 
बेहद संतप्त हूँ। 
बोल नहीं सकता 
कह नहीं सकता 
सबके सामने 
मै रो नहीं सकता.
भरी भीड़ में रेंगता है हाँथ कोई 
मेरी पीठ पर;और मैं
कुछ नहीं बोलता,
कह नहीं सकता कुछ; 
भले ही बॉस की पत्नी 
चिकोटी काट ले मेरे गालों पर सरेआम. 
मै चुप रहता हूँ;जब मेरी मां 
ताना देती है मुझे 
अपने ही बच्चे का डायपर बदलने पर....
रात भर बच्चे के साथ जगती पत्नी 
कोसती है मुझे 
और मै कुछ नहीं करता; 
आज तक नहीं सीख पाया 
नन्हे शिशु को गोद में लेना, 
कान में गूंजती है माँ की हिदायत 
गिरा मत देना बच्चे को;
और मै! 
सहम कर छुप जाता हूँ 
चादर के भीतर; 
भले ही तड़पता रहूँ पत्नी और बच्चे के दर्द पर.
सोशल मीडिया के पन्ने 
भरे हैं औरत के दर्द से; और मै  
चुपचाप कोने में खड़ा हूँ. 
दिन भर खटता हूँ रोजी कमाने को 
फिर भी; सामाजिक भाषा में 
मै बेवड़ा हूँ.
मालिक हूँ,
देवता हूँ,
पिता हूँ ,
बेटा हूँ,
हर रिश्ते में बार-बार पिसा हूँ. 
मर्द हूँ,
अभिशप्त हूँ 
जीवन के दुखों से 
बेहद सन्तप्त हूँ।


Tuesday, December 14, 2021

आत्मबोध

 

मेरे भीतर एक जादूगर रहता है
न मुझसे जुदा , न मुझसा
मुझे दूर से देखता हुआ दिखाता है मुझे आत्ममोह,
या ख़ुदा! कितना अलग है मुझसे मेरा मै
आत्मध्वजा के भार से झुका हुआ मै
झुक ही नहीं पाता माफ़ी के दो लफ्ज़ो में,
शुक्रिया के शब्दों का झूठ
मेरी ही आत्मा पर जमा रहा कालिख है...
न न .. अब और नहीं
और नहीं लादूँगा खुद पर 'कुछ होने' का बोझ
नहीं तो ..!
मेरा जादूगर बदल देगा मुझे उस सुनहरी छड़ी में
जिसकी छुअन से सच झूठ में बदल जाता है...

#अपर्णा

Sunday, November 7, 2021

चूहे की बारात (बाल कविता)

 चूहा अपनी ही बारात से भाग गया !! आख़िर क्यों ??


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Thursday, September 9, 2021

उंगलियों का तिलिस्म

 उतरन की तरह उतार कर रख दिया प्रेम,
कमरे के भीतर उतार कर रख दी आत्मा,
वह अभी भी सांकल पर रखी उँगलियों का तिलिस्म खोजती है,
वे जो खोल देती हैं दरवाजे से दुनिया...

सोलह श्रृंगारों का साथ,
सुहागन की पहचान,
वंश की बेल को जिंदा रखने का एहसास

फिर भी उंगलियों का जादू जिस्म की सांकल नहीं खोल पाता,
रूह और प्रेम के बिना भी बीत जाती है ज़िन्दगी,
कट जाती है उमर
बढ़ता है वंश भी 
बस
एक इंसान मात्र शरीर रह जाता है...
Picture credit -Siddhant 






#अपर्णा

Monday, August 30, 2021

बच्चे की भगवान से बात

ईश्वर के वैभव को देखकर एक बच्चा भगवान से कुछ इस प्रकार बातें करता है..

Saturday, August 14, 2021

प्रेम और शांति के बीच हम

 किसे नहीं पसंद है

रातों का मख़मली होना,

सुबह के माथे पर उनींदी ओस की बूंदें,

झुमके के साथ हिलते बालों का मचलना,

वे इलाइची की गंध में पगी चाय की खुशबू खोजते हैं,

जैसे तलाशते हैं अफ़ग़ान बच्चे शांति का एक कोना,

जहां बंदूकों और बमों की आवाजें न हों,

जब तालिबानी लड़ाकों की मासूमियत मर जाती है,

तभी धरती से सूख जाती है शबनम!

रात के आंचल पर बिखर जाता है मासूम तारों का लहू,

क्यों न चाय के गिलास में पिला दी जाय शांति की दवा,

हिंसक मंसूबों पर उड़ेल दिए जांय मासूम बच्चों के कहकहे,

आओ! दुनिया के माथे पर एक बोसा दिया जाय

और सोख लिया जाय सारा ज़हर..

फ़िर झुमके  के साथ झूमेंगे बाल भी, हम भी...

झूमती हवाएँ


#अपर्णा वाजपेयी

दुविधा

पैरों ने सबसे पहले शुक्रिया कहा जूतों को, जूतों ने कदमों का साथ दिया, कदमों ने रास्ते का चुम्बन लिया और रास्ते ने सफलता झोली में डाल दी.. उन...