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चुड़ैल (कविता)

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मेरे गांव में उतरा करते हैं प्रेत, जवान लड़कियों की दाग दी जाती है ज़बान, मिर्चा और सरसों का धुँआ प्रेत भगाने का अचूक हथियार है, औरतों के ही शरीर में पैठती है चुड़ैल, बन्द किवाड़ों के भीतर चुड़ैल भगाता है गांव का ओझा, औरतों की पीठ जलते कोयले को बर्फ़ में बदल देती है, जूड़े में पलाश की आग जलाकर लड़कियां प्रेत को बांध लेती हैं अपनी गांठ में, महुआ की गंध चुड़ैल का इत्र बन जाती है औरतें रज में बहा देती हैं ओझा का तंत्र, सरसों और मिर्च को चटकार जाती हैं नन्ही अमियों के साथ,  गोल दुनिया को दरवाज़े पर लटका;  औरतें चुड़ैलों के साथ खेल लेती हैं  अक्कड- बक्कड़। ©️अपर्णा बाजपेयी

एक ख़ास दिन

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खुशियों के साथ बिताया एक पूरा दिन  जी हां बच्चे खुशियों का वह समंदर होते हैं कि उनके पास जाते ही आंनद की धारा आपके पास दौड़ी चली आती है ।आप चाहे तो उनके साथ पूरा जीवन बिता सकते हैं। मैं अपने काम के दौरान गांव में जाती हूं। लोगों से मिलती हूं ।बच्चों के साथ समय बताती हूं और उस दौरान ऐसा लगता है जैसे मेरे जीवन में कहीं कोई दुख, कोई कष्ट कुछ भी नहीं है या जीवन इतना सुखद लगता है कि भगवान को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने मुझे ऐसे मौके दिए जब मैं उन लोगों से मिल पाती हूं जिन लोगों को मेरी जरूरत है। जिन्हें वास्तव में सुने जाने की जरूरत है। जिन्हें कहना नहीं आता कि वास्तव में वे चाहते क्या हैं। जो बहुत थोड़े में संतुष्ट हैं। जिनके लिए आलीशान घर, बड़ी गाड़ी यह कोई बहुत बड़ी ख्वाहिशें नहीं हैं। जो पेट भर भोजन, सिर पर छत और मौसम के हिसाब से सही कपड़े मिल जाने से संतुष्ट हैं। जो चाहते हैं कि उनके बच्चों को शिक्षा मिले भले ही वे न पढ़ पाए हों। जो चाहते हैं कि उनके बच्चों को रोजगार मिले ।उनके बच्चों को पैसों के लिए मोहताज ना होना पड़े। उनके बच्चों को समय पर जरूरत पड़ने पर चिकित्सा मिले । वे सारी सुव

जीवन दीप

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जिन्हे दीवाली पसंद थी ; उन्होंने रंगो को उजाला समझा, मुस्कानों को फुलझडियां, बेटियों को लक्ष्मी, किताबों को सरस्वती, पुत्रों को संपदा पुत्र वधुओं को समृद्धि,  और स्वयं को समझा कुम्हार! बना ही लेगा जीवन को दीप सा ऊर्जा से भर देगा धरती, आकाश, दीप्त करेगा संसार, चाक पर घूमता जी लेगा जीवन।

दीवाली पूजा विधि

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दिवाली का पर्व पूरे भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है । यह 5 दिनों का पर्व होता है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावस्या को दीपावली, अमावस्या के बाद प्रथमा तिथि को होती है गोवर्धन पूजा और उसके बाद भाई दूज। यह पांच त्योहारों का संगम है और 5 दिनों के बाद बिहार और उससे जुड़े हुए लोगों में शुरू हो जाती है छठ पूजा की तैयारी। दोस्तों दीपावली के पहले घरों में साफ-सफाई और एक-एक सामान को बहुत अच्छे से शुद्धता के साथ रखने का कार्य हर घर में किया जाता है। दोस्तों आज हम बात करेंगे कि दीपावली के पूजन में हमें किन किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए और इसकी पूजा की पारंपरिक विधि क्या है । अगर हम सक्षम हैं और विधि विधान से पूजा करते हैं तो हमें उसका फल जरूर मिलता है ऐसा हमारे शास्त्रों में वर्णित है. Picture credit Google दिवाली का त्यौहार हर व्यक्ति, हर परिवार और हर समाज के लिए खुशहाली का पर्व है. इस दिन धन की देवी महालक्ष्मी का पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजन किया जाता है. महालक्ष्मी के पूजन से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सुख और आनंद की प्राप्ति होती है. दीपावली के दिन सर्वप्रथम घर की अच्छी प्रकार

चंद्रहार या चांद बालियां

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आसमान से झाँक रहे हो तुम क्या जानो मामाजी दुनिया कितनी बदल गई है  नई हवा से लो कुछ सीख । Image credit shuterstock  धरती तेरी बहना है जब  मिलने क्यों न आते हो , चंदा तारे घर ले आऊं  मन को क्यों भरमाते हो । एक तरफ़ हैं रजत रश्मियां  एक ओर सुन्दर मुखड़ा, मेरी दुल्हन मांग रही है  तुझ सा कुछ उपहार बड़ा । मैं भी ढूँढ रहा हूँ कब से  चाँद सरीखा हार कोई।  चंद्र हार या चांद बालियां  साड़ी पर चांदी की बेल, पत्नी के हाथों रख पाऊँ  ऐसा कुछ तू कर दे खेल। भरी टोकरी सपनों वाली, ख़ाली क्यों अपनी है जेब  नीचे आओ तो जानोगे  मुस्कानें सब कितनी fake । अम्मा झूठ बोलती हैं  कि चंदा मेरा भाई है, नहीं जानती रिश्ते-नाते  के न कोई मानी हैं। समय नहीं है,काम बहुत है  मिलने की न बात करो  चंदा को तुम friend बना लो  Facebook पर add करो  जब जब मिलने का मन होवे  प्रोफाइल पर visit करो, बात करने की इच्छा हो तो  मैसेंजर पर Hello करो।   Notification देख के चंदा  तुम तक खुद आ जाएगा, रिश्ते नाते सब सच्चे हैं इसका भरम निभाएगा। ।

बिकाऊ लोग

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 वे घुलते रहे  हम कहकहे लगाते रहे,  Image credit to freepic वे गिरे  हमें हंसी आई , वे भूख से बिलबिला रहे थे  हम भरे पेट डकार रहे थे, उन्होंने एक कहानी कही ;रोटी की  हमने विकास का राग अलापा, दुनिया ने सुना हमारा राग  हमने बंद कर दिए सबके मुँह लालच ठूंस कर  वे हमारी आवाज़ के इंतज़ार में हैं  और हम बढ़ने वाले बैंक बैलेन्स के। । #मीडिया 

आदिवासियों के घर और रहन- सहन

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  आइए देखते है किस प्रकार तैयार करते हैं #झारखंड   के  #आदिवासी समुदायों के लोग अपने घरों को। प्राकृतिक तरीके और साम्रगी से तैयार की जाती है #WallPutty aur #walldecor के लिए इस्तेमाल किए जाते है #chamicalfreecolours #environmentfriendly , #womenemployment, दिवाली की तैयारियों में आप भी ग्रामीण महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं इन्हें अपने घरों के रंग रोगन और साज सज्जा में शामिल कर सकते हैं। इसी बहाने दूसरों के घर भी रौशन हो जाएंगे।