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शेयरिंग इज केयरिंग

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पार्क की बेंच पर बैठकर  बातें करते हो मुझसे, अपने स्कूल की कहानियाँ सुनाते हो, मै मुस्कुराता हूँ तुम्हारी खुशी पर, ललचाता हूँ तुम्हारे स्कूल की  कहानियों में  शामिल होने के लिए, तुम्हारी चमकती पोशाक  मेरी नीदें चुरा लेती है  तुम्हारी भाषा  मुझे कमतरी का एहसास कराती है, मै दौड़ता हूँ तुम्हारे साथ हर दौड़  पर  जीतते तुम्ही हो, जब अपने पुराने कपड़े देकर  सीखते हो तुम शेयरिंग इज केयरिंग, तब मेरे हिस्से के फल  भरे होते हैं तुम्हारे रेफिजरेटर में, मेरे हिस्से की किताबें  पड़ी होती हैं तुम्हारे घर के कबाड़ में, जब तुम जाते हो स्कूल मेरे घर की रौशनी चमकाती है तुम्हारा भविष्य तुम्हारी स्कूल बस  धुआं भले ही छोड़ती है मेरे ऊपर  फिर भी दूर तक भागता हूँ मै उसके पीछे, रोज रोज तुम्हारे पीछे भागने के बावजूद कभी नहीं पंहुच पाता उस चमकती हुयी दहलीज के भीतर  जंहा मेरे हिस्से की सीट पर  कोई और काबिज है. (Image credit shutterstock)

अच्छे बच्चे

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अच्छे बच्चे रोते नहीं  न ही करते हैं जिद  भूख लगने पर माँगते नहीं खाना  ललचाई हुयी नज़रों से देखते नहीं भरी हुयी थाली।  अच्छे बच्चे कहना मानते हैं माँ-बाप का  फटे कम्बल में सो जाते हैं  ठिठुरते हुए पैर मोड़ कर.....   पार्टियों की पत्तलों से खोज लेते हैं अपना हिस्सा  छोटे भाई बहनों को खिलाते हैं पहले।  अच्छे बच्चे स्कूल नहीं जाते  भोर अँधेरे काम पर जाते हैं  कमाकर भरते हैं पेट परिवार का  खेलने की उम्र में सीख जाते हैं दुनियादारी।  अच्छे बच्चे बचपन में ही ओढ़ लेते हैं बुढ़ापा  खिलखिलाते नहीं, रोते नहीं, उड़ते नहीं  अच्छे बच्चे जन्म से ही बड़े हो जाते हैं  बन जाते हैं आदमी  अच्छे या बुरे  दुनिया जानती है! (Picture credit google)

जूठी प्लेटो का इंतज़ार

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