मोबाइल वाला भूत- पीछे मत देखना
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मोबाइल वाला भूत- पीछे मत देखना
सीतापुर जिले के एक छोटे से गाँव हरिहरपुर में शाम बहुत जल्दी हो जाती थी । खेतों से लौटते लोगों की आवाज़ें, मंदिर की घंटियाँ और दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ पूरे गाँव को एक अलग ही माहौल देती थीं। गाँव के बाहर एक पुराना पीपल का पेड़ था, जिसके नीचे मिट्टी की एक पुरानी समाधि बनी हुई थी। गाँव वाले कहते थे कि वहाँ रात को नहीं जाना चाहिए। गाँव के बुज़ुर्ग लोग बताते थे कि कई साल पहले वहाँ एक साधु रहते थे, और वे एक रात उनकी किसी ने हत्या कार दी थी । हत्यारा आज तक नहीं मिला। लोगों को शक है है कि वे कुछ तन्त्र मन्त्र करते थे और बच्चों को अपना निशाना बनाते थे। कुछ उनके बारे में अब भी अच्छी बातें करते हैं तो कुछ बुरी। वे दिन भर में सिर्फ एक बार भोजन करते थे और जिस दिन उन्हें भोजन नहीं मिलता था उस दिन भूखे सो जाते थे। लोग कहते हैं वे जो कह देते थे वह हो जाता था। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद से वह जगह भूतिया घोषित हो गई और लोग अब उसके आस - पास जाने से भी डरते हैं ।
लेकिन मोबाइल का नेटवर्क उस जगह के आस पास अच्छा आता है । इसलिए आजकल के लड़के वहीं घूमते- फिरते या मोबाइल देखते मिल जाते हैं। लोग जब उन्हें वहाँ जाने से मना करते हैं या उस जगह के बारे में बताते हैं वे उनकी बात हंसी में उड़ा देते हैं और विश्वास नहीं करते ।
उसी गाँव में भारत नाम का सोलह साल का लड़का रहता था। उसके हाथ से मोबाइल कभी नहीं छूटता था। सुबह उठते ही रील, दिन भर गेम और रात को हॉरर वीडियो। उसकी माँ कई बार समझाती—“बेटा, इतना मोबाइल मत देखा करो। आँखें खराब हो जाएँगी, दिमाग में दर बस जाएगा।” लेकिन भारत हँसकर टाल देता।
“अरे माँ, ये सब पुरानी बातें हैं।”
एक शाम भारत अपने दोस्तों के साथ खेलकर लौट रहा था। तभी उसका दोस्त सोनू बोला , “अगर तू इतना बहादुर है, तो आज रात समाधि पर बैठकर मोबाइल चला के दिखा।”
बाकी लड़के भी हँसने लगे।
भारत को अपनी बहादुरी दिखानी थी। उसने तुरंत हामी भर दी।
रात करीब साढ़े नौ बजे वह चुपके से घर से निकल गया। हाथ में मोबाइल, कान में ईयरफोन और जेब में पावर बैंक। गाँव की गलियाँ सुनसान थीं। दूर कहीं उल्लू की आवाज़ आ रही थी।
जब वह समाधि के पास पहुँचा, तो हल्की ठंडी हवा चल रही थी। पीपल के पत्ते अजीब तरह से हिल रहे थे। लेकिन भारत ने ध्यान नहीं दिया। वह समाधि पर बैठ गया और मोबाइल में हॉरर वीडियो देखने लगा। कुछ देर बाद उसका इंटरनेट अचानक बंद हो गया। “ये नेटवर्क भी ना…” वह बड़बड़ाया। तभी उसे लगा जैसे पीछे कोई खड़ा है।
उसने मुड़कर देखा… लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
भारत फिर मोबाइल देखने लगा। अचानक मोबाइल की स्क्रीन अपने आप चमकने लगी। उसने देखा कि गैलरी में एक नया वीडियो आया है। वीडियो का नाम था — “पीछे मत देखना”
भारत चौंक गया।
“ये किसने भेजा?”
उसने वीडियो चलाया।
वीडियो में वही समाधि दिखाई दे रही थी… वही पीपल का पेड़… और वीडियो में एक लड़का बैठा था, जो मोबाइल चला रहा था। भारत के हाथ काँपने लगे। वह लड़का धीरे-धीरे कैमरे की तरफ मुड़ा…वो भारत ही था।
भारत का गला सूख गया। उसने जल्दी से वीडियो बंद करना चाहा, लेकिन मोबाइल हैंग हो गया। तभी वीडियो में पीछे एक काली परछाईं दिखाई दी। उसका चेहरा धुँधला था, आँखें सफेद और लंबी उँगलियाँ मिट्टी पर घिसट रही थीं।
वीडियो में वह परछाईं धीरे-धीरे भारत के पीछे आकर खड़ी हो गई।
भारत डर के मारे जम गया।
तभी उसके कान में किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
“अब पीछे मत देखना…”
भारत का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसके हाथ काँप रहे थे। लेकिन डर के कारण उसने धीरे-धीरे गर्दन घुमाई।
पीछे कोई नहीं था।
उसने राहत की साँस ली ही थी कि अचानक मोबाइल की स्क्रीन पर लिखा आया—
“तुमने पीछे क्यों देखा?”
अचानक पूरा माहौल बदल गया। हवा बहुत तेज़ चलने लगी। पीपल के पत्ते जोर-जोर से हिलने लगे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई पेड़ पर दौड़ रहा हो।
भारत घबराकर उठने लगा, तभी उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसका पैर पकड़ लिया है।
उसने नीचे देखा…
मिट्टी के अंदर से एक काला हाथ उसका पैर पकड़ रहा था।
भारत चीख पड़ा।
उसने पूरी ताकत से पैर छुड़ाया और भागने लगा। लेकिन मोबाइल की फ्लैशलाइट अपने आप जल-बुझ रही थी। रास्ता साफ नहीं दिख रहा था। अचानक उसके ईयरफोन में अजीब आवाज़ आने लगी—
“मोबाइल में ही जीना है ना… अब यहीं रहो…”
भारत रोने लगा। उसने मोबाइल फेंकने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल उसके हाथ से चिपका हुआ था। स्क्रीन पर लगातार डरावने चेहरे दिखाई दे रहे थे। भागते-भागते वह गाँव के पास पहुँचा और अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। सुबह जब गाँव वालों ने उसे देखा, तो वह सड़क किनारे पड़ा काँप रहा था। उसकी आँखें लाल थीं और चेहरा बिल्कुल सफेद। घर लाने के बाद कई दिनों तक वह कुछ बोल नहीं पाया।
जब उसकी हालत थोड़ी ठीक हुई, तो उसने सारी बात बताई। लेकिन किसी ने उसकी बात पर पूरा विश्वास नहीं किया। सबको लगा कि शायद डर के कारण उसे भ्रम हुआ होगा।
लेकिन उस घटना के बाद भारत पूरी तरह बदल गया।
उसने मोबाइल चलाना लगभग छोड़ दिया। अब वह सुबह खेतों में अपने पिता का हाथ बँटाता, छोटे बच्चों को पढ़ाता और शाम को दोस्तों के साथ खेलता।
एक दिन उसकी माँ ने पूछा—“अब मोबाइल क्यों नहीं देखते?”
भारत कुछ देर चुप रहा, फिर बोला—
“माँ, मोबाइल बुरा नहीं होता… लेकिन जब इंसान उसमें इतना खो जाए कि आसपास की दुनिया भूल जाए, तब वो डरावना बन जाता है।”
उसकी बात सुनकर माँ मुस्कुरा दी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कुछ महीनों बाद गाँव के एक दूसरे लड़के ने दावा किया कि उसे समाधि के पास एक टूटा हुआ मोबाइल मिला। मोबाइल बंद था, लेकिन जैसे ही उसने उसे चालू किया, स्क्रीन पर सिर्फ एक ही वीडियो था—
“पीछे मत देखना…”
और कहते हैं, उस वीडियो में आज भी रात के अँधेरे में समाधि पर बैठा एक लड़का दिखाई देता है… जिसके हाथ में मोबाइल चमक रहा होता है
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