Horror story: Kya aap online hain

Kya aap online hain 

रिया को रात में देर तक मोबाइल चलाने की आदत थी।
वह एक कंटेंट राइटर थी और अक्सर काम के बाद भी सोशल मीडिया स्क्रॉल करती रहती थी। अकेले रहती थी, इसलिए फोन ही उसका सबसे बड़ा साथी था।
एक रात लगभग 2:17 बजे उसके फोन पर एक नोटिफिकेशन आया।
**"आपकी स्क्रीन टाइम रिपोर्ट तैयार है।"**
रिया ने अनमने ढंग से नोटिफिकेशन खोला।
रिपोर्ट में एक अजीब बात थी।
उस दिन उसका कुल स्क्रीन टाइम **19 घंटे 43 मिनट** दिखाया गया था।
वह हँस पड़ी।
"बकवास है। मैं इतनी देर फोन कैसे चला सकती हूँ?"
उसने रिपोर्ट बंद कर दी।
लेकिन तभी उसकी नज़र नीचे एक और आँकड़े पर गई।
**सबसे अधिक उपयोग किया गया ऐप: Gallery**
कुल समय: **6 घंटे 11 मिनट**
रिया चौंक गई।
वह दिन भर काम में व्यस्त थी। उसने गैलरी मुश्किल से खोली होगी।
जिज्ञासा में उसने गैलरी खोली।
सब कुछ सामान्य था।फिर उसने हाल की तस्वीरें देखीं। आखिरी तस्वीर 2:03 AM की थी।
वह तस्वीर देखकर उसका गला सूख गया। वह उसके अपने बेडरूम की फोटो थी। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने कमरे के कोने में खड़े होकर तस्वीर ली हो। तस्वीर में रिया खुद बिस्तर पर सो रही थी।
उसने तुरंत कैमरा लॉग चेक किया। फोटो वास्तव में उसके फोन से ली गई थी।
लेकिन उस समय तो वह सो रही थी।उस रात वह ठीक से नहीं सो पाई।
अगली सुबह उसने खुद को समझाया कि शायद कोई तकनीकी गड़बड़ी होगी। लेकिन अगले दिन फिर वही हुआ। सुबह उठते ही उसे गैलरी में एक नई तस्वीर मिली। इस बार तस्वीर उसके कमरे की नहीं थी। तस्वीर उसके चेहरे की थी। बहुत पास से ली गई। इतनी पास कि उसकी बंद पलकों की रेखाएँ साफ दिख रही थीं। रिया के हाथ काँपने लगे।
उसने दरवाज़े, खिड़कियाँ, सब जाँच लिए। सब अंदर से बंद थे। अब उसने फोन में पासवर्ड बदला, फेस लॉक हटाया, कैमरा परमिशन बंद की, यहाँ तक कि रात में फोन बंद करके सोई।

फिर भी...

अगली सुबह एक नई तस्वीर मौजूद थी। इस बार तस्वीर पूरी तरह काली थी।
सिर्फ एक कोने में सफेद अक्षरों में लिखा था—
**"तुम जल्दी सो जाती हो।"**
उस दिन के बाद रिया बदलने लगी। ऑफिस में उसका ध्यान नहीं लगता। रात को वह बार-बार जाग जाती। उसे लगता कोई उसे देख रहा है।
लेकिन डरावनी बात यह नहीं थी। डरावनी बात यह थी कि उसे यकीन होने लगा कि शायद सचमुच कोई उसे देख रहा है। एक सप्ताह बाद तस्वीरों की संख्या बढ़ने लगी।
हर सुबह एक नई फोटो। कभी उसके किचन की। कभी बाथरूम के बाहर की। कभी उसके दरवाज़े की। हर तस्वीर ऐसे कोण से ली गई होती जहाँ उसका फोन रखा ही नहीं था। और हर तस्वीर के साथ एक छोटा संदेश होता।
"आज तुम रोई थीं।"
"आज तुमने झूठ बोला।"
"आज तुमने माँ का फोन नहीं उठाया।" ऐसी बातें जो किसी बाहरी व्यक्ति को पता नहीं हो सकती थीं।
अब रिया ने पुलिस से संपर्क किया। फोन जाँच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट आई। कोई हैकिंग नहीं। कोई स्पाइवेयर नहीं। कोई रिमोट एक्सेस नहीं। कुछ भी नहीं। फोन पूरी तरह सुरक्षित था।
उस रात रिया ने फैसला किया कि वह जागती रहेगी। पूरी रात। फोन सामने रखकर। देखेगी कि आखिर होता क्या है .
रात 1 बजे।
कुछ नहीं।
2 बजे।
कुछ नहीं।
3 बजे।
आँखें भारी होने लगीं।
उसने खुद को जगाए रखा।
3:41 AM.
फोन की स्क्रीन अपने आप जल उठी।
बिना छुए।
बिना नोटिफिकेशन।
स्क्रीन पर कैमरा खुल गया।
रिया ने घबराकर फोन उठाया।
कैमरे में उसका कमरा दिखाई दे रहा था।
लेकिन कैमरा जिस जगह से रिकॉर्ड कर रहा था...
वह फोन की जगह नहीं थी।
दृश्य कमरे के दूसरे कोने से आ रहा था।
जहाँ कुछ था ही नहीं।
रिया ने काँपते हुए स्क्रीन देखी।
कैमरे में वह खुद कुर्सी पर बैठी दिखाई दे रही थी।
ठीक उसी क्षण कैमरे की फ्रेम में एक और आकृति आई। रिया के पीछे। धीरे-धीरे। काली।धुँधली।
मानव जैसी।
रिया झटके से पीछे मुड़ी।
वहाँ कोई नहीं था।
फिर उसने स्क्रीन देखी।
आकृति अब भी वहाँ थी।
और धीरे-धीरे उसके कंधे के पास झुक रही थी।
रिया चीख पड़ी।
फोन उसके हाथ से गिर गया।
स्क्रीन टूट गई।
कैमरा बंद हो गया।
अगली सुबह उसने फोन फेंक दिया।
नया फोन खरीद लिया।
नया नंबर।
नया अकाउंट।
सब कुछ नया।
धीरे-धीरे उसकी ज़िंदगी सामान्य होने लगी।

लगभग छह महीने बाद।

एक शाम वह अपने लैपटॉप पर पुरानी फाइलें देख रही थी। अचानक उसे क्लाउड बैकअप में एक फ़ोल्डर मिला।
नाम था—

**SCREEN TIME REPORTS**

उसने खोला।अंदर सिर्फ एक फ़ाइल थी।आखिरी अपडेट: **कल रात।**
रिया का दिल धड़कने लगा।
उसने फ़ाइल खोली। अंदर एक ही तस्वीर थी।
तस्वीर उसी समय की थी।
अभी की।
रिया अपने लैपटॉप के सामने बैठी थी। ठीक वैसे ही जैसे वह उस क्षण बैठी हुई थी। और उसके पीछे...

एक धुँधली आकृति खड़ी थी। इस बार तस्वीर के नीचे कोई संदेश नहीं था।
सिर्फ एक स्टेटस लिखा था—

**ONLINE NOW** ●

रिया ने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा...

 कहानी यहीं समाप्त होती है.......

क्योंकि कुछ डरावनी चीज़ें भूत नहीं होतीं।
वे सिर्फ यह एहसास होती हैं कि शायद आप कभी भी सचमुच अकेले नहीं थे। 📱👁️

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