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मंहगाई में त्यौहार

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चीनी मंहगी, गुड़ भी मंहगी मंहगा दूध मिठाई है, खील बताशे मंहगे हो गए क्योँ दीवाली आयी है? एक नहीं, दो नहीं, दस नहीं खुशियों से है भरा बाज़ार, कुछ लोगों की जेबें भरता जाल बिछा है अपरम्पार. खाली चूल्हा, जेबें खाली अपने हिस्से आया शून्य, सब चीजों का दाम बढ़ गया मानव का बस घट गया मूल्य. रेल टिकट का दाम बढ़ गया भैया कैसे आऊँ मै? रोली अक्षत मंहगे हो गए कैसे प्यार लुटाऊँ मै? लिखती हूँ कुछ शब्द नेह के यही हमारा हैं त्यौहार, कुछ पढ़ना कुछ जी लेना तुम इन्हें समझ लेना उपहार. (Image credit google)