अच्छे बच्चे
अच्छे बच्चे रोते नहीं न ही करते हैं जिद भूख लगने पर माँगते नहीं खाना ललचाई हुयी नज़रों से देखते नहीं भरी हुयी थाली। अच्छे बच्चे कहना मानते हैं माँ-बाप का फटे कम्बल में सो जाते हैं ठिठुरते हुए पैर मोड़ कर..... पार्टियों की पत्तलों से खोज लेते हैं अपना हिस्सा छोटे भाई बहनों को खिलाते हैं पहले। अच्छे बच्चे स्कूल नहीं जाते भोर अँधेरे काम पर जाते हैं कमाकर भरते हैं पेट परिवार का खेलने की उम्र में सीख जाते हैं दुनियादारी। अच्छे बच्चे बचपन में ही ओढ़ लेते हैं बुढ़ापा खिलखिलाते नहीं, रोते नहीं, उड़ते नहीं अच्छे बच्चे जन्म से ही बड़े हो जाते हैं बन जाते हैं आदमी अच्छे या बुरे दुनिया जानती है! (Picture credit google)