Wednesday, September 16, 2020

रोटी का ख़त

चूल्हे की रोटी ने संदेशा भेजा है,
गए हुए लोगों ने याद किया भाफ़ को,
रोटी के ख़त ने कहा है हवाओं से
कि कह देना उनसे!
चलें आएं वापस,
बहार लौट चुकी है,
वापसी के रास्तों पर नहीं जमी है अभी घास
पावों को याद होगा अब भी
पगडंडी पर अलसाई ओस का स्पर्श,
लौटना कभी उतना मुश्किल नहीं होता
जितना जाना,
आत्मा को अपने सामान में समेटना,
कितना तो कठिन होता है
आंगन, देहरी, दीवारों से अपना हांथ छुड़ाना,
लौटने के लिए हमेशा बची रहती है आस,
पूछना उनसे जो छोड़ गए थे घर, खेत, माता पिता,
यूं ही, रोटी रोज़गार, नून तेल सब की जुगत में..
इस बार लौटे तो खाली दालान ने कैसे की अगवानी,
टूटे छप्पर ने लोरी गाई 
कुंए के पानी ने ख़ाली पेट को तर किया या नहीं...
कहना उनसे कि बांध लें असबाब,
खेतों में मकई ने बांध दिया है समा,
नन्हकू के छपरा पर फैला है कुम्हड़ा,
अमरूद भर दे रहा है आंगन अपने बेटों से..
और इस बार आना
वापसी का टिकट फाड़ कर फेंक देना रास्ते में
गांव की बात गांव में , घर की बात घर में...
अब सरकारी डायरियों में शहर की भीड़ छंट जाएगी।

©️ अपर्णा बाजपेई

चित्र प्रभास कुमार की फेसबुक वाल से साभार

Friday, September 11, 2020

अस्तित्व

 अच्छा हुआ कि

आकाश हरा नहीं हुआ,

धरती को लेने दी उसकी मन चाही रंगत,

पेड़ों ने बर्फ के रंग न चुराए

और बर्फ रही हमेशा अपने ही रंग में,

अगर मिल जाता रंग धरती और आकाश का 

तो क्या;

धरती 'धरती' रहती!

और आकाश बना रह पाता आकाश?

©️ अपर्णा बाजपेई

चित्र  कवियत्री 'नताशा' की फेसबुक वाल से साभार

Monday, September 7, 2020

खिड़की

 कमरे की बंद खिड़की के पास,

एक चुप

चुपके से खिसक आती है,

सीकचों से झांकती है घूंघट के भीतर का आकाश,

हवा धीरे से छू लेती है उसकी अल्कों का दामन

और चुप; चुपचाप ढक कर अपनी रूह के निशान,

खिड़कियों के पीछे  छाप देती है

अपनी हंथेलियों के अनकहे रंग।

©️ अपर्णा बाजपेई



Friday, September 4, 2020

शिक्षक जानता है

 कक्षा की अंतिम कतार में 

बैठता है अपने समय का सबसे प्रतिभाशाली छात्र,

कॉपी के अंतिम पृष्ठ पर है रची जाती है

उसकी बोरियत की रंगीन दुनिया,

शिक्षक जानता है, 

रंगा जा रहा है आज की शिक्षा का काला इतिहास;

हर जीनियस बच्चे की कॉपी के अंतिम पृष्ठ पर,

शिक्षक समझता है,

उसके पाठ हो चुके हैं अर्थहीन,

रोजी- रोजगार की संभावनाएं अब

स्कूली किताबों के लिए दिवा स्वप्न है,

शिक्षक जानता है वह मार रहा है 

छात्रों की कल्पनाशीलता को रटाते हुए पुराने जवाब,

मौन और मक्कारी के समय में शिक्षक 

भर रहा है अपने बच्चों का पेट,

विद्यालय में उपस्थिति का रजिस्टर 

और

मिड डे मील की थालियों की गणना

शिक्षकों का प्रथम और अंतिम कर्तव्य है,

©️ अपर्णा बाजपेई











जल है तो कल है

 सुनें एक कहानी और खोजें पानी बचाने के नए नए तरीके