Saturday, December 9, 2017

' ए फॉर एप्पल' नहीं 'ए फॉर अनन्या'


सीकचों से झांकती हुई नन्ही परी 
इशारा करती है
बुलाती है मुझे 
बुदबुदाती है धीरे से मेरे कान में 
मुझे भी आता है 'ए फॉर एप्पल '
नम्बर्स भी; पूरे हंड्रेड तक!
एक बड़ी सी मुस्कराहट के साथ 
सरगोशी करती है,
एक बुक भी है मेरे पास;
बड़े- बड़े चित्रों वाली 
रंगीन!
रद्दी से चुन कर लाये थे पापा
और एक पेन भी,
चमकते हुए नीले रंग का..... 
मझे पढ़ना भी आता है 
और बोलना भी,
बस स्कूल नहीं जाती
चल नहीं सकती न........
तो क्या हुआ!
एक दिन मै भी किताबें लिखूँगी,
बताऊंगी सबको,
'ए फॉर अनन्या' भी होता है 
और 'अ से अनन्या' भी.... 
फिर हर किताब में 
एप्पल और अनार की जगह 
मेरी फोटो छपेगी
मेरा नाम 'अनन्या' है न!

(Picture credit google)



2 comments:

  1. Bahut behatreen likha hai. Main har roz aise hi bachhon ko dekhti rahti hun bahut taklif hoti hai dekhkar. Kabhi-kabhi to samajh mein nahi ata hai ki kin tasalli bhare shabdon se unke parents ki counselling karun.
    Behatreen hai apki kriti isliye bhi ki apne us dard ko samjha aur logon tak ye shabd pahunchaye ki wo bhi ise samajh sakein.

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  2. बेहतरीन अभिव्यक्ति
    सुंदर रचना

    ReplyDelete

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