झूठे बाज़ार में औरत
एक पूरा युग अपने भीतर जी रही है स्त्री, कहती है ख़ुद को नासमझ, उगाह नहीं पायी अब तक अपनी अस्मिता का मूल्य, मीडिया की बनाई छवि में घुट-घुट कर होंठ सी लेती है स्त्री, सड़कों पर कैंडल मार्च करती भीड़ में असली भेड़ियों को पहचान लेती है स्त्री चुप है, कि उसके नाम पर उगाहे जा रहे हैं प्रशस्ति पत्र, रुपयों की गठरियाँ सरकाई जा रही हैं गोदामों में, स्त्री विमर्श के नाम पर झूठ के पुलिंदों का अम्बार लग रहा है, लोग खुश हैं! कि रची जा रही है स्त्री की नई तस्वीर, खोजती हूँ कि इस तस्वीर से आम औरत ग़ायब है? (Image credit google)
नमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (02-08-2021 ) को भारत की बेटी पी.वी.सिंधु ने बैडमिंटन (महिला वर्ग ) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। (चर्चा अंक 4144) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।
चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
#रवीन्द्र_सिंह_यादव
आदरणीय रवींद्र जी, हमारे इस प्रयास को मसनच पर स्थान देने के लिए सादर आभार
हटाएंअति सुन्दर बाल कथा ।
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया अमृता जी
हटाएंसादर
संवेदनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति है इस कहानी में ।
जवाब देंहटाएंसुंदर बाल कहानी।
इस कहानी को अपना बहुमूल्य समय देने के लिए सादर आभार दी
हटाएंप्रिय अपर्णा कल सुनी थे ये बाल कथा | अच्छा लगा कि तुम बच्चों की रूचि को ध्यान मेंरखकर इतनी सुंदर कहानियाँ लिखती हो और मधुर वाचन से बच्चों तक सरलता से पहुँचाने का प्रयास भी करती हो | मोना के माध्यम से एक संवेदशील प्रेरक पात्र का सृजन हुआ है | बच्चे सुनेंगे तो जरुर मोना जैसे पशु प्रेमी बनना चाहेंगी | महावत का ह्रदय बदले वाली ये बालिका जरुर बच्चों के मन को छुएगी |
जवाब देंहटाएंप्रिय रेनू दी,
जवाब देंहटाएंआपकी टिप्पणी दिन बना देती है। बच्चों के कोमल मन में हम जैसे बीज रोपते हैं, बड़े होकर उनके हृदय से वैसी ही भावनाएँ प्रस्फुटित होती हैं। इंद्रधनुषी दुनिया के माध्यम से बच्चों के बीच कुछ मूल्यवान करने की कोशिश कर रहे हैं हम। आप सब अग्रजों का सहयोग और आशीर्वाद ही इस संघर्ष में हमारा संबल है।
सादर