एक ख़ास दिन

खुशियों के साथ बिताया एक पूरा दिन 

जी हां बच्चे खुशियों का वह समंदर होते हैं कि उनके पास जाते ही आंनद की धारा आपके पास दौड़ी चली आती है ।आप चाहे तो उनके साथ पूरा जीवन बिता सकते हैं। मैं अपने काम के दौरान गांव में जाती हूं। लोगों से मिलती हूं ।बच्चों के साथ समय बताती हूं और उस दौरान ऐसा लगता है जैसे मेरे जीवन में कहीं कोई दुख, कोई कष्ट कुछ भी नहीं है या जीवन इतना सुखद लगता है कि भगवान को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने मुझे ऐसे मौके दिए जब मैं उन लोगों से मिल पाती हूं जिन लोगों को मेरी जरूरत है। जिन्हें वास्तव में सुने जाने की जरूरत है। जिन्हें कहना नहीं आता कि वास्तव में वे चाहते क्या हैं। जो बहुत थोड़े में संतुष्ट हैं। जिनके लिए आलीशान घर, बड़ी गाड़ी यह कोई बहुत बड़ी ख्वाहिशें नहीं हैं। जो पेट भर भोजन, सिर पर छत और मौसम के हिसाब से सही कपड़े मिल जाने से संतुष्ट हैं। जो चाहते हैं कि उनके बच्चों को शिक्षा मिले भले ही वे न पढ़ पाए हों। जो चाहते हैं कि उनके बच्चों को रोजगार मिले ।उनके बच्चों को पैसों के लिए मोहताज ना होना पड़े। उनके बच्चों को समय पर जरूरत पड़ने पर चिकित्सा मिले । वे सारी सुविधाएं मिलें जो एक आम नागरिक को एक स्वतंत्र देश में मिलनी चाहिए। 

आज एक ऐसे ही गांव में गई थी और जहां मुझे बच्चों के साथ कुछ थोड़ा सा वक्त बिताने का मौका मिला। मैंने सोचा क्यों ना उनके साथ थोड़ा खेलती हूं और मैंने उनके साथ खेल खेला। उनकी खुशी ऐसी थी मानो उन्हें कोई बहुत बड़ा खजाना मिल गया हो। आप भी उन पलों को मेरे साथ इंजॉय कीजिए इस छोटे से वीडियो में...


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ज़माने के साथ(लघु कथा)

पेंटिंग का राज (धारावाहिक कहानी) भाग 2

पेंटिंग (धारावाहिक कहानी) भाग 3 अंतिम भाग