हम दोनो



कुछ बातें कुछ मौन उधारी 

हमने रखी बारी - बारी।

सपने देखे झूठ सरीखे 

जीवन बदला पारी - पारी 


© अपर्णा बाजपेई 




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आख़िरी इच्छा (लघुकथा)

दयाल सिटी में वैदिक यज्ञ - हवन के साथ सात दिवसीय पतंजलि योग विज्ञान शिविर का समापन

कह दो, गर कुछ कहना है,