Saturday, July 1, 2017

जज़्बा


2 comments:

  1. न रहे हार में हार जहां ,जीत जीत से मुह मोड़े
    उस पथ पर दौड़े रथ मेरा जो मंज़िल मन्ज़िल न खेले।

    गोवँशी श्रीधर

    ReplyDelete
  2. न रहे हार में हार जहां ,जीत जीत से मुह मोड़े
    उस पथ पर दौड़े रथ मेरा जो मंज़िल मन्ज़िल न खेले।

    गोवँशी श्रीधर

    ReplyDelete

मंदिर में महिलाएं

अधजगी नींद सी कुछ बेचैन हैं तुम्हारी आंखें, आज काजल कुछ उदास है थकान सी पसरी है होंठों के बीच हंसी से दूर छिटक गई है खनक, आओ...