Monday, August 14, 2017

आज़ादी का जश्न


1 comment:

  1. क्या बात है। 'शब्दों के पुलिंदे'तेल नमक लगाकर डकार सकते हैं। चौराहे पर पसरी क्रांति का जश्न।
    बड़ा अलंकारिक प्रयोग। इस कारण उग्रता में उष्णता आ गयी। बढ़ियाँ।

    ReplyDelete

मंदिर में महिलाएं

अधजगी नींद सी कुछ बेचैन हैं तुम्हारी आंखें, आज काजल कुछ उदास है थकान सी पसरी है होंठों के बीच हंसी से दूर छिटक गई है खनक, आओ...