Wednesday, January 13, 2021

नया कुछ रचना है

पानी में रहना है
मगर से लड़ना है
किस्सों की दुनिया में
नया कुछ रचना है।

होशियार से होशियारी की
लोहार से लोहे की
पेड़ों से लकड़ी की
शिकायत नहीं करते हैं।

आंखों से पानी को
भरे घर से नानी को
बैलों से सानी को
अलग नहीं करते हैं।

बातों में मिठास को
दावत में लिबास को
बीमारी में उपवास को 

दरकिनार नहीं करते हैं।।


©️ अपर्णा बाजपेई

13 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १५ जनवरी २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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    1. रचना को मंच पर स्थान देने इसे लिए सादर आभार स्वेता जी

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  2. बहुत सुंदर रचना

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  3. वाह
    बहुत सुंदर
    बधाई

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  4. वाह! क्या बात है। अनुप्रासम सुंदर रचना!--ब्रजेंद्रनाथ

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  5. सादर आभार आदरणीय

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नया कुछ रचना है

पानी में रहना है मगर से लड़ना है किस्सों की दुनिया में नया कुछ रचना है। होशियार से होशियारी की लोहार से लोहे की पेड़ों से लकड़ी की शिकायत नह...