#मूत्र कथा



कैसा जमाना आ गया है, हाँथ में चमकौवा डंडा पकड़े , मोबाइल लटकाए जहाँ देखो तहां वीडियो बना रहे हैँ। लड़केे हों या लड़कियां, दोनों एक दूसरे से चार कदम आगे। हर चीज वीडियो में है। चूल्हा जलाने से लेकर बप्पा की गाली तक। बीड़ी से लेकर शराब तक और देहरी से लेकर श्मशान तक।
वीडियो में वे भी बकर-बकर करते हैं जिनकी घर में जुबान नहीं चलती। कुछ तो ऐसा वीडियो बनाते हैं कि जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता।
अब राम सहारे की बिटिया को ही देख लीजिए । ऐसा वीडियो बनाई है कि प्रधानमंत्री पुरस्कार दे रहे हैं। बताओ ऐसा क्या है इसमें!
इधर राम सहारे सिर पकड़े दरवाजे पर बैठे हैं। का करें बिटिया ने काम ही ऐसा किया है कि न हँसते बनता है न रोते। कल स्कूल से लौट रही थी तो सड़क किनारे दो लड़के पिचकारी की होड़ लगा रहे थे। किसकी पेशाब कितनी दूर जाती है।

ये लड़कों का आम खेल है। बचपन से सड़क किनारे मूत लेने की आज़ादी है। फ़िर अम्मा तो कभी- कभी रेलवे प्लेटफार्म पर पैंट खोल कर खड़ा कर देती थीं कि अभी ट्रेन नहीं आ रही है जल्दी से निपट ले।आदत वही लगी है, अब तो शर्म भी नहीं आती। पेशाब लगने पर कहीं भी रोड किनारे खड़े हो जाते हैं और लड़कियों को घर में सिखाया जाता है कि अगर कोई सड़क किनारे लघु शंका से निवृत्त हो रहा हो तो उस रास्ते से लौट आना, या कहीं दूर जाकर खड़ी हो जाना नहीं तो लोग बेशर्म कहेंगे।
तो कहानी चल रही थी राम सहारे की बिटिया की। उसने वीडियो बना लिया पेशाब का खेल खेलते लड़कों का और इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया #मूत्रकथा साथ में ट्विटर, यूट्यूब,सारे सोशल साइट्स पर अपलोड और शेयर कर दिया। लड़कियों के गैंग ने इतना प्रचारित किया कि सेलिब्रिटीज तक शेयर करने लगे। बड़े बड़े नेताओं को भी वीडियो के बारे में खबर हो गई और मीडिया इस वीडियो को लेकर उड़ चला। क्यों भाई?

क्योंकि एक नई फैशन डिजाइनर ने डाइपरजींस, डाइपर पैन्ट का आइडिया एक पॉडकास्ट में दिया और फैशन डिजाइनर्स में लड़के और लड़कियों दोनों के लिए डाइपर पैन्ट का मार्केट दिखने लगा. लोग सभ्य समाज में ऐसी असभ्य हरकत अब और बर्दास्त नहीं करेंगे।फिर स्वच्छ भारत मिशन का क्या होगा। वहीं पर झाड़ू लगाओ और वहीं पर लघु शंका कर लो।

 आज़ादी का सवाल तो और भी बड़ा है । सड़क पर पैदल चल रही लड़कियां अगर कहीं पर बैठ जाएं तो आफ़त आ जाएगी। बेशरम जैसे और न जाने कितने अपशब्द सुनने को मिलेंगे। जब लड़के रोड पर कहीं भी हल्के हो सकते हैं तो लड़कियां क्यों नहीं। इस मुद्दे को लेकर कुछ संगठनों ने बाकायदा मार्च निकालना शुरू कर दिया।

एक वीडियो ने सालों से चली आ रही परंपरा खुले में मूत्र विसर्जन को अचानक देश का ज्वलंत मुद्दा बना दिया ।प्रधानमंत्री जी के संज्ञान में जब यह बात आई कि लड़कियों को सड़क पर पैदल चलने में एक ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। न माता पिता का, न समाज के बड़ों का।

एक लड़की ने इस समस्या की ओर सबका ध्यान खींचा है जो कि बहुत जरूरी मुद्दा है। देश में सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी है। अब लड़के लड़कियां दोनों ही समान रूप से घर से बाहर निकलते हैं। फिर लड़कियां ऐसी असभ्यता नहीं करती भले ही उन्हें अपनी सेहत से समझौता करना पड़ता है और लड़के खुले आम कहीं भी शुरू हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री जी ने राम सहारे की बिटिया को स्वतंत्रता दिवस पर नवचेतना पुरस्कार देने की घोषणा की है और देश भर में सड़कों के किनारे हर तीन मिलोमीटर की दूरी पर सार्वजनिक शौचालय बनवाने की योजना पर काम करने के लिए शहरी ग्रामीण निकायों को आदेश दिया है।

लेकिन पूरा गाँव राम सहारे की बिटिया को गाली दे रहा है कि पेशाब करते हुए लड़कों का वीडियो क्यों बनाई और बनाई तो अपलोड क्यों की।

अब आप बताइए राम सहारे की बिटिया के #मूत्रकथा को आप लाइक करेंगे या नहीं और हाँ उसके चैनल को सबस्क्राइब जरूर कर लीजिएगा। 


टिप्पणियाँ

  1. आपकी यह कहानी इतनी रोचक है कि पढ़ते-पढ़ते कब प्रारंभ से अंत तक पहुंच गया, पता ही नहीं चला।

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