Friday, July 20, 2018

स्वाद!

उनकी टपकती खुशी में
छल की बारिश ज़्यादा है,
आँखों में रौशनी से ज्यादा है नमी,
धानी चूनरों में बंधे पड़े हैं कई प्रेम,
ऊब की काई पर तैरती है ज़िंदगी की फसल
गुमनाम इश्क़ की रवायत में,
जल रही हैं उंगलियां,
जल गया है कुछ चूल्हे की आग में,
आज खाने का स्वाद लज़ीज़ है।
©Aparna Bajpai
(Image credit alamy stock photo)

16 comments:

  1. उम्दा।दिल की गहराई तक छू गई।... आज खाने का स्वाद लज़ीज़ है...बहुत कुछ रचा और बसा है इस पंक्ति में।

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    1. बहुत आभार आभा दी, ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
      सादर

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  2. वाह!!बहुत खूब!!👌

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    1. हार्दिक आभार दी, सादर

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 22 जुलाई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. रचना को मान देने के लिए बहुत बहुत आभार भाईसाहब।
    सादर

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, यह इश्क़ नहीं आसान - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. शुक्रिया शिवम जी,
      सादर

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  6. बेहतरीन रचना

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  7. बहुत बढियां।

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  8. बहुत सुन्दर ...

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  9. गागर में सागर..

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अटल जी की अवधी बोली में लिखी कविता

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