संदेश

रासायनिक विध्वंश की आशंका (Fears of chemical destruction)

घनघोर अंधेरी रात में जब घुमड़ते हैं मेघ दिल थर- थर काँप उठता है। सात समंदर पार बैठे हमारे अपने लोगों के सिर पर कंही बरस न रहे हों गोले - बारूद, आतताइयों के बनाये मंसूबों से उजाड़ न हो रही हों मासूम बच्चों की जिंदगियां। जिस प्रकार बह रहा है गुजरात , झेल रहे है पूर्वोत्तर राज्य बाढ़ की विभीषिका , उस पराये से देश में; रासायनिक विध्वंश की बाढ़ न आ गयी हो, बह न गयी हो मानवता। जब युद्धोन्माद सिर चढ़ कर बोलता है, देश के नमक हराम शाशक भूल जाते हैं मानवीय व्यवहार, सामने वाले को कमतर समझने की भूल करके; अपने ही नागरिकों को देने लगते हैं मृत्युदंड। बरसते हुए मेघ शांत नहीं कर पाते उन्माद की ज्वाला। ऐसे में एक आम नागरिक कर ही क्या सकता है सिवाय थर- थर कांपने के; और बनाये रखने के उम्मीद, सही सलामत लौट आयेंगे वे लोग; जो गए तो थे रोजी- रोजगार के लिए , आज वंहा काल के गुलाम बन कर रह गए हैं।

सोलह श्रंगार

नख से सिख तक सोलह श्रंगार से सजी तुम्हारी अर्धान्गिनी; तुमने पलट कर भी नहीं देखा! तुम्हे पता भी है इन श्रंगारों की कीमत, नाक , कान, हाथ, पैर शरीर का एक- एक अंग रखना पड़ता है गिरवी दूसरे के नाम, हर कदम ,हर हरकत जैसे नुमाइश करता है दोनो का रिश्ता. औरत का वज़ूद पैबंद लगे पर्दे सा डोलता है दरवाजे के दरम्यान और दुनिया उसे सतीसावित्रीके मापदन्डो पर तौलती है. अपना मान- सम्मान अस्मिता, अस्तित्व सब कुछ  उसके नाम करने के बावजूद कंहा बन पाती है सच्चे मायने में अर्धान्गिनी; कि धर्म , अर्थ और सम्मान में पुरुष हमेशा ही गिना जाता है उससे ऊपर, दर्द , तकलीफ़ और ज़ज़्ब में औरत पुरुष से आगे खडी होती है. तन के पोर-पोर को सोलह श्रंगारों में बांध कर भी कभी कभी बांध नहीं पाती पति का दिल और वह; पतीक्षारत रहती है जीवन भर सच्ची अर्धान्गिनी सा सम्मान पाने कि लिये.

शौक-ए-हमसफर

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#Lalu yadav & #Niteesh kumar

#Lalu Yadav वोट दिये हम तुमको अपनी , तुम क्यों धोखा खाये ? बोलो तो लालू यादव. तेजस्वी से कहकर तुमने क्यों न इस्तीफ़ा दिलाया बोलो तो लालू यादव? कहा से इतना पैसा आया क्यों नहीं सबको बताये ? बोलो तो लालू यादव . किसका कुर्ता साफ़ यंहा है कौन न संपत्ति बनाये? बोलो तो लालू यादव. सफ़ाई से माल हड़पते ऐसे दिन क्यों लाये? बोलो तो लालू यादव . तेज प्रताप , तेजस्वी के संग मीसा को भी फन्साये बोलो तो लालू यादव. #Niteesh Kumar दो - दो मोदी के चक्कर में तुम कबसे थे आये ? बोलो तो नीतिश भैया. कल इस्तीफ़ा आज शपथ ली कब सब सेट कर आये? बोलो तो नीतिश भैया. लालू से तुम गले मिले थे मोदी से हाथ मिलाये कैसे हुआ नितीश भैया? तुम कहते हो भ्रष्ट नहीं मै कैसे बहुमत लाये बोलो तो नितीश भैया?

बस इतनी सी कहानी

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Truth can never be killed (सच कभी मारा नहीं जा सकता)

मेरे साथियों ! आओ भोंक दो मेरे सीने में अपने पैने खंज़र , टुकड़े - टुकड़े कर दो मेरे, बहा दो मेरे जिस्म से खून की धार फिर भी नहीं मरूंगा मै ! मुझे मारने का दिन-रात षड्यंत्र करने वालों , ओढ़ लो स्वार्थ की सफ़ेद चादर , काली पट्टियां बाँध लो अपनी आँखों पर देने लगो न्याय विक्रमादित्य की तरह ; फिर भी नहीं मार पाओगे तुम : उस सच को , जो ज़िंदा रखेगा मुझे तुम्हारे आसपास , मेरी आवाज़ तुम्हेु फुफकारगी , सांय - सांय करने लगेंगे तुम्हारे कान , मेरा सच भीतर ही भीतर खोखला कर देगा तुम्हें , तुम ज़िंदा लाश बन घूमते रहोगे यंहा - वंहा, और मैं ; मरकर भी जीवित रहूंगा अपने सच मे क्योंकि सच कभी मारा नहीं जा सकता।

Time never be old ( बूढ़ा नहीं होता समय )

बच्चे  हमेशा संजोते रहते है कुछ न कुछ टूटी प्लास्टिक , कांच की बोतलें कूड़े में बिखरे कीमती सामान , भीख के कटोरे और  कूड़े के बोरे में; शाम को ले आते हैं बच्चे ; माँ बाप के लिए रोटी , भाई बहन क लिए टॉफी : और अपने लिए ! एक और आने वाला दिन। हर आने वाले दिन में वो छुपाकर रखते हैं , माँ के सपने , बाप की उम्मीद , देश का भविष्य और दुनिया की आस। बच्चे नहीं थकते कभी जानते है वे कि कोई भी आने वाला दिन बूढ़ा नहीं होता।