Friday, August 11, 2017

कत्लगाह


1 comment:

  1. बहुत खूब ... गहरा एहसास लिए शब्द ...

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मंदिर में महिलाएं

अधजगी नींद सी कुछ बेचैन हैं तुम्हारी आंखें, आज काजल कुछ उदास है थकान सी पसरी है होंठों के बीच हंसी से दूर छिटक गई है खनक, आओ...