Saturday, July 15, 2017

कचरे का ढेर


रेल के डिब्बे में कई दंपत्ति एक साथ सफर कर रहे थे . वो लोग जो भी बिकने के लिए आ रहा था साथ में खरीदकर मिलजुलकर खा रहे थे. कभी चाय , कभी चिप्स , कभी कुरकुरे, कभी मूंगफली(peanut). वे लोग सारा कचरा वंही इकठ्ठा कर रहे थे . 
तभी एक छोटा सा लड़का झाड़ू लगाता हुआ आया . उसने वंहा पर का सारा कचरा साफ कर दिया. सफाई करने के बाद उसने उनलोगों से पैसे मांगे . सभी लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगे. उस लड़के ने सबको देखा पर किसी ने उसे पैसे नहीं दिए. उनमे से एक आदमी उस लड़के से बोला " भीख मांगता है , शर्म नहीं आती . चल भाग यंहा से ".
लड़का कुछ देर चुपचाप खंडा रहा फिर बोला ," आप लोग कचरे के ढेर पर बैठे थे . मैंने इस जगह को पूरा साफ किया . भीख नहीं मांग रहा अपनी मेहनत का पैसा मांग रहा हूँ. अगर हम जैसे लोग इस तरह ट्रेनों की सफाई न करें तो ये ट्रेन आप जैसों के दिमाग की तरह कचरे का ढेर बन जाएँ" .वह  चुपचाप वहाँ से चला गया . वे सभी एक दूसरे का मुंह देख रहे थे .

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अटल जी की अवधी बोली में लिखी कविता

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