Thursday, July 20, 2017

नेतागिरी

इसकी टोपी उसके सिर
उसकी टोपी इसके सिर
कंहा से सीखा ?


अरे क्या कह रहे है भैया !
पुरखों से यही धंधा तो करते आ रहे है

नेतागिरी तो हमारे खून में है .........

2 comments:

अटल जी की अवधी बोली में लिखी कविता

मनाली मत जइयो मनाली मत जइयो, गोरी  राजा के राज में जइयो तो जइयो,  उड़िके मत जइयो,  अधर में लटकीहौ,  वायुदूत के जहाज़ मे...